रायपुर में साइंस कॉलेज चौपाटी हटाने पर हंगामा, निगम की कार्रवाई का कांग्रेस ने किया विरोध

रायपुर। राजधानी में शनिवार सुबह प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान अचानक तनाव की स्थिति बन गई, जब नगर निगम रायपुर की टीम साइंस कॉलेज चौपाटी को हटाने पहुँची। निगम ने पूरी चौपाटी को हटाकर उसे अमानाका ब्रिज के नीचे स्थानांतरित कर दिया। कार्रवाई के दौरान कांग्रेस नेताओं ने现场 पर पहुंचकर जोरदार विरोध किया, जिससे कुछ देर के लिए माहौल गर्मा गया।

निगम का पक्ष: नियमों के विरुद्ध चल रही थीं कई दुकानें

नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि चौपाटी का निर्माण नियमानुसार नहीं किया गया था और कई दुकानों का संचालन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुरूप नहीं हो रहा था। इसी कारण इसे हटाना आवश्यक हो गया था। निगम का कहना है कि नई जगह पर दुकानदारों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।

राजेश मूणत बोले—“यह आज का विवाद नहीं, साढ़े तीन साल पुराना मसला”

रायपुर पश्चिम के भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि साइंस कॉलेज चौपाटी का मुद्दा अचानक नहीं उठा है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी इस निर्माण का विरोध किया था। उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी की ओर से इसे ‘यूथ हब’ बताकर विकसित किया गया था, जबकि जमीन खेल विभाग की थी, न कि नगर निगम की।

मूणत ने कहा कि लगभग 29 लाख रुपए में एक एजेंसी को दुकानें संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। करीब 60 दुकानों से प्रति माह 25 हजार रुपए किराया लिया जा रहा था, लेकिन एग्रीमेंट के मुताबिक कई दुकानों का संचालन शुरू ही नहीं हुआ। ऐसे मामलों को देखते हुए निगम ने आज कार्रवाई की। उन्होंने कांग्रेस के विरोध को “राजनीतिक दिखावा” करार दिया।

महापौर मीनल चौबे—नई जगह पर उपलब्ध होंगी सभी सुविधाएँ

रायपुर महापौर मीनल चौबे ने कहा कि यह चौपाटी शुरुआत से ही नियमों के खिलाफ थी और भाजपा लगातार इसका विरोध करती रही है। उन्होंने बताया कि 60 दुकानों को किराए पर दिया गया था और निगम को किराया प्राप्त हो रहा था। नई जगह पर भी दुकानदारों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

महापौर ने यह भी कहा कि जिस स्थान पर पहले चौपाटी थी, वहाँ जल्द ही नालंदा परिसर का निर्माण शुरू होगा, जो शहर के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है।

राजनीतिक विवाद जारी रहने की संभावना

कार्रवाई के दौरान सभापति सूर्यकांत राठौड़, भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश ठाकुर और निगम अधिकारी मौजूद रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चौपाटी को लेकर विवाद आगे भी जारी रह सकता है, क्योंकि दोनों ही दल इसे अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से जनता के सामने रख रहे हैं। निगम का यह कदम भले ही प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उठाया गया हो, लेकिन उसका राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

 

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